Day 7: हिंदुस्तान का धन चोरी करना बीजेपी का लक्ष्य

भारत जोड़ो न्याय यात्रा का सातवां दिन। इद्रधनुष के सात रंगो से निराले नॉर्थईस्ट की सातों बहनों की बात सुनने और उसे दुनिया को बताने, एक बार फिर राहुल तैयार होकर निकल पड़े। आज के यात्रा की शुरूआत लखीमपुर के बोगीनाडी से शुरू हुई। न्याय यात्रा के काफिले के साथ लाखों लोग आज भी साथ थे। रोज़ाना हजारों लोगों की भीड़ को देखकर यही सुकून होता है कि जहां किसी राजनैतिक रैली के लिए लोगों को पैसे देकर बुलाया जाता है, वहां श्री राहुल गांधी के न्याय यात्रा से जुड़ने के लिए लोग खुद ही इतनी गर्मजोशी से आ रहे हैं।

सड़क के दोनों ओर लोगों की कतारें, श्री गांधी की एक झलक पाने को आतुर आंखें, उनसे हाथ मिलाने के लिए बेताब लोग, ये है भारत जोड़ो न्याय यात्रा की सच्चाई। लोगों के इसी प्यार और उत्साह के साथ श्री राहुल गांधी का काफिला चलता रहा। हर जगह स्थानीय लोगों ने श्री गांधी का पूरे जोश के साथ स्वागत किया। पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाएं न्याय यात्रा की बस के आते ही जोश में ‘राहुल गांधी जिंदाबाद’ का नारा लगाने लगीं। हर कोई श्री गांधी की एक झलक पाना चाहता था।

देश के लोगों का यही अपनापन, न्याय के इस संघर्ष पथ पर मुझे अडिग बनाता है! #BharatJodoNyayYatra

Posted by Rahul Gandhi on Saturday, January 20, 2024

आज मिलने वालों में सबसे पहले ताई अहोम का एक प्रतिनिधिमंडल था। इन्होंने श्री गांधी से अपनी समस्याओं के बारे में विस्तार से चर्चा की। बातचीत का सिलसिला जब शुरू होता है तभी समाधान की गुंजाइश होती है। न्याय यात्रा और श्री गांधी का यही लक्ष्य लोगों के बीच उन्हें लोकप्रिय कर रहा है।

इसके बाद न्याय यात्रा का काफिला पोडूमोनी मंदिर में रूका, जहां श्री गांधी ने कुछ पल बिताए। पोडूमोनी मंदिर की स्थापना 1951 में हुई थी। इस मंदिर का लखीमपुर और पूरे असम के लोगों के लिए बहुत महत्व है। मंदिर, देवी पोडूमोनी की पूजा पद्धति के लिए प्रसिद्ध है। साथ ही वहां का शांत वातावरण, मानसिक शांति का माहौल भी इस मंदिर को अद्भूत बनाता है।

लखीमपुर में आने के बाद श्री गांधी ने सबसे पहले सराईघाट युद्ध के नायक, अहोम साम्राज्‍य के सेनापति लचित बोरफुकन जी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। लचित बोरफुकन जी ने सराईघाट के युद्ध में मुगलों के खिलाफ जिस बहादुरी से लड़ाई लड़ी थी वो आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।

लचित बोरफुकन जी को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद श्री राहुल गांधी ने बिरसा मुंडा जी को भी फूलों से श्रद्धांजलि अर्पित की। न्याय यात्रा के काफिले को रास्ते में बच्चों की टोली भी मिली। ये बच्चों सड़कों के दोनों ओर कतार लगाकर खड़े थे और ‘जोड़ो जोड़ो भारत जोड़ो’ का नारा बुलंद किए जा रहे थे। देश के भविष्य को अपने भविष्य का उद्घोष करते सुन भला श्री गांधी गाड़ी में कैसे बैठ रहते। उन्हें उतरना ही था। वो बस से उतरे और उन बच्चों से मिले।

दोपहर के विश्राम के लिए यात्रा लखीमपुर के गोविंदापुर, लालुक में रूकी। यहां उनके भोजन और आराम की व्यवस्था की गई थी। भोजनावकाश के बाद यात्रा न्याय यात्रा लखीमपुर के हरमुट्टी की ओर बढ़ चली। यहां से यात्रा को अरूणाचल प्रदेश के गुमतो जाना था। अरूणाचल की सीमा में प्रवेश करने के बाद श्री गांधी से 4 लोग मिलने आए। ये वो लोग थे जिन्हें अग्निपथ योजना की वजह से अपनी नौकरी गंवानी पड़ी। इन युवकों ने श्री गांधी के सामने अपनी बात रखी और अपने साथ हुए अन्याय के बारे में बताया।

अब न्याय यात्रा का काफिला गुमतो पहुंच चुका था। गुमतो में असम के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा अरूणाचल के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को राष्ट्रीय ध्वज हस्तांतरित किया गया। इसके साथ ही यात्रा के अरूणाचल में आगाज़ की घोषणा हो गई।

ध्वज हस्तांतरण के बाद कांग्रेस नेता श्री राहुल गांधी ने उपस्थित लोगों के सामने भाषण दिया। भाषण में श्री गांधी ने एक बार फिर केंद्र सरकार पर प्रहार करते हुए कहा- ‘अरूणाचल के लोगों ने बहुत प्यार से, दिल से मेरा स्वागत किया उसके लिए मैं उनका धन्यवाद करता हूं। RSS-BJP के लोग एक धर्म को दूसरे धर्म से लड़ा रहे हैं।

मीडिया बेरोजगारी, महंगाई, जनता के मुद्दों की बात नहीं करती है। इसलिए हमने भारत जोड़ो यात्रा शुरू करने की सोची। नॉर्थ ईस्ट देश के बाकी राज्यों जितना जरूरी है। हम 6-7 घंटे यात्रा करते हैं और शाम को 20 मिनट भाषण देते हैं।

4 अरूणाचल के युवा ने बताया कि सरकार ने उनके साथ कैसे नाइंसाफी की है। ऐसे ही 1 लाख 50 हजार युवा हैं जिनके साथ सरकार ने धोखा किया है। आपकी क्या समस्याएं हैं। चीन के साथ आपका बॉर्डर लगता है। चीन से संबंधित या फिर आपके पास जो भी समस्याएँ हैं वो हमें बताएँ। हम आपके मुद्दे सुनने के लिए, समझने के लिए यात्रा पर आए हैं। आपकी भाषा, आपके कल्चर की रक्षा करने के लिए ये यात्रा आई है।’ श्री गांधी के भाषण के बाद उन्होंने मिथुन गेट, ईटानगर में अपनी पदयात्रा की। ईटानगर की इस यात्रा में भी श्री गांधी से मिलने कई लोग आए। इनमें से एक थे अरूणाचल प्रदेश ओलंपिक संघ के प्रतिनिधि टोकी टेकोम। टोकी टेकोम और अन्य खिलाड़ियों को चीन ने मान्यता देने से इंकार कर दिया था। श्री टेकोम ने इस मसले पर भारत सरकार के ठंडे रवैये के बारे में श्री गांधी को बताया।

ईटानगर में न्याय यात्रा का काफिला अपनी रफ्तार से बढ़ता जा रहा था। इंडियन ऑयल के एक प्लांट के सामने से काफिला गुजर रहा था। श्री गांधी ने जब उसमें काम करने वाले कामगारों को गेट पर उनका इंतजार करते देखा तो बस को रोकने का आदेश दिया। बस से नीचे उतर कर वो लोगों के बीच गए, उनसे बातें की और फोटो क्लिक कराई। लोगों ने उन्हें उपहार दिए। दोइमुख में श्री गांधी ने लोगों को संबोधित किया और कहा- ‘जो नॉर्थ ईस्ट के स्टेट हैं, चाहे वो छोटे हों, उनकी जगह, उनका महत्व बड़े राज्यों के जैसा ही होना चाहिए। उनकी भाषा, उनका कल्चर, उनके रहन-सहन से बहुत कुछ सीखा जा सकता है। अरूणाचल में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, महंगाई सब हावी है। आपके पैसे से जो GST लिया जाता है वो आपको वापस नहीं दिया जाता। सड़कों में खड्डे हैं, आप चल नहीं सकते। हमारा लक्ष्य जो आपके सामने कठिनाईयां है, जो आपके साथ अन्याय किया जा रहा है, जो आपके दिल में है उसको सुनने का है, उसको संसद में उठाने का है और उसके बाद बाकी देश को बताने का है।

बीजेपी का लक्ष्य हिंदुस्तान का धन चोरी करने का है। मणिपुर में इन्होंने आग लगा दी और वहां का पैसा उठाकर ले जाते हैं, उठाकर अपने दो तीन उद्योगपति मित्रों को दे देते हैं। दिल्ली में मैं आपका सिपाही हूं। जो भी काम आप चाहें, जो भी आपके सवाल हूं, जिन मुद्दों पर आप बात करना चाहें मैं उसे संसद में उठा सकता हूं।’ इस जनसभा के बाद भारत जोड़ो न्याय यात्रा की बस ईटानगर के चिम्पू शहर की तरफ चली गई जहां पर उनके रात्रि विश्राम का इंतजाम किया गया था।

“देश का कोई भी व्यक्ति, जो अपने ऊपर अन्याय महसूस कर रहा है, जिसके ऊपर किसी भी तरह का अन्याय हो रहा है, वो न्याय योद्धा बन सकता है। अगर आप भी न्याय योद्धा बनना चाहते हैं तो 9891802024 पर मिस्ड कॉल करें।”

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