Day 4: नागालैंड की लड़ाई के लिए राहुल हैं तैयार

भारत जोड़ो न्याय यात्रा ने अपने चौथे दिन के सफर को भी पूरा कर लिया है।

नागालैंड के वीके टाउन में एक छोटे से सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ चौथे दिन की शुरूआत हुई। सुबह 9 बजे यहां से श्री राहुल गांधी जीप में आगे की यात्रा के लिए निकले। वीके टाउन से मोकोकचुंग के लिए निकले काफिले के स्वागत के लिए भी सड़कों पर लोगों की कतारें लगी थी। रास्ते में श्री राहुल गांधी का काफिला अलिचन नामक गांव में एक छोटी सी चाय दुकान पर स्थानीय नागा लोगों से बात और मुलाकात करने के लिए रूका। वहां छोटी छोटी बच्चियां के साथ श्री गांधी ने गप्पे लगाईं। उनके मासूम सवालों का उतनी ही मासूमियत से जवाब दिया।

मोकोकचुंग पहुंचने के पहले रास्ते में ही श्री गांधी ने पास से जा रहे बाइकर ग्रुप के लोगों के साथ भी रूककर बातचीत की। बाइक के प्रति उनकी दीवानगी किसी से छुपी नहीं है। ऐसे में बाइकर ग्रुप को देखकर तो उनको रूकना ही था। बाइक ग्रुप के लोगों से उन्होंने उनकी बाइक के बारे में जाना। बाइक कि जानकारी और उसके बारे में विस्तार से समझा। जिन भी लोगों को भारत जोड़ो न्याय यात्रा एक राजनैतिक यात्रा लग रही है उन्हें इस वीडियो में राहुल गांधी और बाइक ग्रुप के लोगों के बीच की बातचीत सुननी चाहिए। एक बाइक प्रेमी इंसान की ललक को समझने के लिए वो वीडियो ही काफी है।

Had a fun chat with a biker group touring Nagaland - all of us on different Yatras, but with the same motive, cherishing beautiful Bharat Mata!

Posted by Rahul Gandhi on Tuesday, January 16, 2024

इसके बाद श्री राहुल गांधी का काफिला टाउन हॉल मोकोकचुंग पहुंचा जहां उन्होंने एक जनसभा को संबोधित किया। इस जनसभा में उन्होंने अपनी बात तो इंग्लिश में रखी लेकिन लोगों तक उनकी ही भाषा में संदेश पहुंचाया। जनसभा को संबोधित करते हुए श्री गांधी ने कहा- ‘रास्ते में जब हम जा रहे थे तो अलीचन गांव के पास हमें लोगों ने चाय पीने के लिए आमंत्रित किया। वहां छोटी छोटी बच्चियों के साथ हम चाय पी रहे थे। एक बच्ची ने मुझसे पूछा कि इस यात्रा के पीछे का हमारा आइडिया क्या है? मैंने उसे कहा कि मैंने सुना है सामने वाले घर में एक बहुत ही ज्ञानी इंसान रहते हैं। मुझे उनसे बात करके ये समझना है कि नागालैंड के लोग क्या महसूस करते हैं, वो क्या सोचते हैं, उनका रहन-सहन कैसा है और उनका जीवन वो कैसे चलाते हैं।’

इतना ही नहीं श्री गांधी ने साफ शब्दों में संदेश दिया कि भाषा, भूगोल, खान-पान या फिर परंपरा के नाम पर किसी के भी साथ भेदभाव सही नहीं है। ये नहीं होना चाहिए। श्री गांधी ने केंद्र सरकार और उनकी विभाजनकारी नीतियों पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि- ‘भारत में वैचारिक जंग छिड़ी हुई है। BJP और RSS के लोग अपनी विचारधारा से अलग किसी भी दूसरे विचाधारा के लोगों पर हमला कर रहे हैं। आप कौन सी भाषा बोलते हैं, आप क्या खाते हैं, आपके यहां विवाह की क्या परंपरा है, वो सब आपकी परंपरा है, उसपर सवाल करने का अधिकार किसी को भी नहीं है। एक भारतीय होने के नाते ये मेरा फर्ज है कि मैं इन परंपराओं, संस्कृतियों और इतिहास का सम्मान करुं।’

नागालैंड के लोगों के साथ किए गए अपने वादे को पूरा न करने पर भी श्री राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री और बीजेपी सरकार को आड़े हाथों लिया। जिस अन्याय की बात भारत जोड़ो न्याय यात्रा में की जा रही है उसका जीता जागता उदाहरण नागालैंड के होहो समुदाय के साथ 2015 में हुए भारत सरकार का समझौता है। भारत सरकार ने उस वक्त इस समझौते को नागा समस्याओं के हल और ऐतिहासिक समझौते के रूप में प्रसारित किया था। लेकिन 9 साल बीत जाने के बाद भी नागा समुदाय से किया गया वादा पूरा नहीं हुआ है। श्री गांधी ने कहा- ‘मुझे शर्म आती है कि हमारे पीएम अभी तक मणिपुर नहीं गए हैं, लेकिन मुझे इस बात से भी शर्म आती है कि 9 साल पहले हमारे प्रधानमंत्री ने नागालैंड से एक वायदा किया था। जिसके बारे में उन्होंने अभी तक कुछ भी नहीं किया है। हमारे प्रधानमंत्री को झूठ नहीं बोलना चाहिए था। अगर नागालैंड की समस्या का उनके पास समाधान नहीं था तो उन्हें कहना चाहिए था कि हम इसका समाधान निकालने की कोशिश करेंगे। इसलिए मैं आपको कहना चाहता हूं कि हमें पता है कि आपकी समस्या बहुत गंभीर है और इसके समाधान की जरूरत है। लेकिन किसी भी समस्या का समाधान बिना नागालैंड के लोगों से बातचीत किए, उनको भरोसे के बिना नहीं निकल सकता है। मुझे इस बात का बहुत दुख है कि हमारे प्रधानमंत्री ने 9 साल में अपने किए वादे को पूरा नहीं किया। लेकिन मैं आपको इस बात का भरोसा भी देता हूं कि हम आपके लिए कड़ी मेहनत करेंगे और आपके समस्या का समाधान लाकर रहेंगे।’

इसके बाद मोकोकचुंग से 32 किलोमीटर चुचुयिमलांग में काफिले ने भोजन के लिए विश्राम लिया। लंच के बाद श्री राहुल गांधी चुचुयिमलांग स्थित गांधी आश्रम में गए। आश्रम के संस्थापक थे स्वर्गीय नटवर ठक्कर, जिन्हें नागालैंड का महात्मा गांधी भी कहा जाता था। 1955 में उन्होंने इस आश्रम की स्थापना की थी जिसके लिए तत्कालिन प्रधानमंत्री श्री जवाहरलाल नेहरू से उन्होंने आर्थिक अनुदान भी मिला था। श्री राहुल गांधी ने नटवर ठक्कर की धर्मपत्नी श्रीमती लेंटिना ओ ठक्कर से भेंट की। एक सुखद संयोग ये भी है कि श्रीमती ठक्कर की मुलाकात स्वर्गीय श्री जवाहरलाल नेहरू से लेकर श्रीमती इंदिरा गांधी, श्री राजीव गांधी के बाद अब श्री राहुल गांधी से हुई।

“देश का कोई भी व्यक्ति, जो अपने ऊपर अन्याय महसूस कर रहा है, जिसके ऊपर किसी भी तरह का अन्याय हो रहा है, वो न्याय योद्धा बन सकता है। अगर आप भी न्याय योद्धा बनना चाहते हैं तो 9891802024 पर मिस्ड कॉल करें।”

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