Day 17: किसानों को चारों ओर से घेरा जा रहा है

भारत जोड़ो न्याय यात्रा अररिया से शुरू हुई। आज के यात्रा की शुरूआत महात्मा गांधी जी को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ हुई। 76 साल पहले, आज ही के दिन, 30 जनवरी 1948 को बिड़ला भवन में नाथूराम गोडसे द्वारा बापू की हत्या कर दी गई थी। इस दिन को शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है। श्री गांधी ने झंडोत्तोलन किया और बापू को श्रद्धांजलि अर्पित की।

अररिया के अंबेडकर चौक से फिर यात्रा अपने अगले गंतव्य की तरफ निकल पड़ी। लोगों की भीड़ आज भी न्याय यात्रा के काफिले के साथ जुड़ी हुई थी। हजारों लोगों का काफिला न्याय यात्रा की बस के साथ साथ चल रहा था। अररिया से न्याय यात्रा ने पुर्णिया की सीमा में प्रवेश किया जहां फिर से लोगों की भीड़ ने श्री गांधी का स्वागत किया।

रास्ते में न्याय यात्रा की बस को श्री गांधी ने अचानक ही एक छोटे चाय की दुकान पर रूकवाया। यहां श्री गांधी ने कुछ नौजवान लड़कियों से बातचीत की। लड़कियों की उस भीड़ में एक बच्ची हाल ही में अपने दादा जी की मृत्यु होने की वजह बहुत उदास थी। श्री गांधी ने उसे दिलासा दिया और गम की उस घड़ी में बच्ची को खुशी के दो पल देने के लिए लड़कियों के उस ग्रुप को बस के अंदर से दिखाने के लिए आमंत्रित किया। इतना ही नहीं श्री राहुल गांधी उन लड़कियों को बस के ऊपर ले गए और रास्ते में खड़े लोगों की भीड़ का अभिवादन भी उनसे करवाया।

थोड़ी दूर चलने के बाद श्री गांधी को रास्ते में एक नवोदय विद्यालय दिखा। फिर से काफिले को रूकवाया गया और श्री राहुल गांधी ने स्कूल में जाकर वहां के प्रिंसिपल, शिक्षकों और छात्रों से मुलाकात की। स्कूल के छात्रों ने बातचीत में श्री गांधी से अपने मन के कई सवाल पूछे, उन सभी के सवालों का तसल्ली से जवाब देकर ही श्री गांधी स्कूल से बाहर निकले। छात्रों एवं शिक्षकों के कहने पर खूब सारी फोटो भी खिंचवाई और छात्रों को भविष्य के लिए शुभकामनाएं देने के बाद काफिला आगे के लिए निकल पड़ा।

पूर्णिया पहुंचने पर श्री गांधी ने सीमांचल के किसानों के साथ ठेठ देसी अंदाज में एक चौपाल लगाई। चौपाल में मोदी सरकार द्वारा किए वादे और उनके सिफर नतीजों से हताश किसानों ने अपनी कठिन परिस्थितियों से श्री गांधी को अवगत कराया। श्री गांधी ने उनकी परेशानियों को संसद में उठाने का आश्वासन देते हुए उपस्थित किसानों को किसान न्याय के बारे में बताया।

श्री गांधी ने कहा- ‘किसानों को चारों ओर से घेरा जा रहा है। आपसे जमीन ली जाती है, अदानी जी जैसे बड़े-बड़े उद्योगपतियों को तोहफे में दे दी जाती है। उसी तरह से खाद, बीज इन चीजों में आप पर दबाव डाला जाता है और फिर आपसे पैसा छिना जाता है। फिर नरेंद्र मोदी जी तीन काले कानून ले आए, और जो आपका था वो आपके आंख के सामने उन्होंने आपसे छिनने की कोशिश की। लेकिन देश के सारे किसान एक साथ इसके खिलाफ खड़े हो गए, और वो पीछे नहीं हटे। इसलिए मैं कहता हूं कि आपकी जान बच गई। मेरी सोच है कि किसान इस देश की रीढ़ हैं। और अजीब सी बात है कि अरबपतियों के 14 लाख करोड़ का कर्ज माफ हो सकता है। अदानी का हो सकता है,माल्या का हो सकता है, मगर किसानों का कर्ज माफ नहीं हो सकता है। अगर किसान का कर्ज माफ नहीं करना है तो अरबपतियों का भी कर्ज माफ नहीं करना चाहिए। ये अन्याय क्यों हो रहा है?’

लंचब्रेक के बाद पूर्णिया के रंगभूमी मैदान में कांग्रेस पार्टी की बड़ी रैली का आयोजन किया गया था। रैली में लाखों की संख्या में लोग भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खरगे और श्री राहुल गांधी को सुनने के लिए आए थे। मंच पर श्री राहुल गांधी का स्वागत सीमांचल की पहचान मखाना से बनी दस किलो की माला पहना कर की गई। मखाना के जरिए बिहार की पहचान विदेशों में भी फैली है। इसे GI टैग मिलना बताता है कि बिहार में भी खाद्य उद्योग में संभावनाएं हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जी को विमान द्वारा बिहार आना था लेकिन जैसा कि मोदी सरकार प्रतिशोध की राजनीति करती आई है, उसी को आगे बढ़ाते हुए खराब मौसम का हवाला देते हुए उनके विमान को बिहार में उतरने पर रोक लगा दी। नतीजतन श्री खरगे पूर्णिया नहीं आ पाए। लेकिन उन्होंने सभा में उपस्थित जनसमूह को एक वीडियो मैसेज के जरिए संबोधित किया।

उन्होंने बीजेपी सरकार पर हमला करते हुए कहा- ‘बड़े ही दुख के साथ ये कहना पड़ता है कि आज इस भूमि पर मौकापरस्ती और लोभ-लालच की राजनीति हावी हो गई है। जो बिहार, दुनिया को प्रकाश देता था, उसकी पहचान अब आया राम, गया राम की राजनीतिक प्रयोगशाला बन गई है। लेकिन हमारे पैर छोटे-मोटे कारणों से डगमगाने वाले नहीं हैं, कोई रहे या जाए, हम अपने उसूलों को छोड़ने वाले नहीं हैं। हम में महात्मा गांधी, सरदार पटेल, मौलाना आजाद, राजेंद्र प्रसाद की रूह है। हम इन्हें कायम रखने के लिए आखिरी सांस तक लड़ेंगे।’

श्री खरगे ने मोदी सरकार द्वारा पिछले दस साल में बिहार को दिए गए धोखे की बात भी कही- ‘बिहार के विकास के लिए यूपीए सरकार में दो लाख करोड़ रूपया दिया गया था। इसमें 6 पावर प्रोजेक्ट, नेशनल हाईवे, पीएम ग्राम सड़क योजना के तहत कई काम हुए। लेकिन मोदी सरकार ने बिहार के साथ हमेशा सौतेला व्यवहार किया, जो मदद मिलती थी वो भी बंद हो गई। चुनाव से पहले बिहार को 1 लाख 15 हजार करोड़ रूपए देने की घोषणा मोदी जी ने पटना के गांधी मैदान में की थी, और वो पैसा कहां गया कोई नहीं जानता। बिहार ने 40 में से 39 सीट भाजपा गठबंधन को दिया, लेकिन मोदी जी ने बिहार की जनता को इसके बदले कुछ भी नहीं दिया। बिहार की जनता को पीछे ही धकेला है।’

कांग्रेस अध्यक्ष के इस भाषण के बाद श्री राहुल गांधी ने जनता को संबोधित किया। उन्होंने हाल ही में नीतीश कुमार द्वारा महागठबंधन का साथ छोड़कर एनडीए का दामन थामने पर कटाक्ष करते हुए कहा- ‘आपके चीफ मिनिस्टर गवर्नर के यहां शपथ ग्रहण के लिए गए, बड़ा धूमधाम था, वहां पर बीजेपी के नेता बैठे थे। गवर्नर साहब बैठे थे, सब एमएलए बैठे थे, शपथ ग्रहण होता है। उनके दो-तीन मंत्री भी शपथ लेते हैं, खूब तालियां बजती हैं और फिर नीतीश जी निकल जाते हैं, वापस सीएम हाउस की ओर चले जाते हैं। गाड़ी में पता चलता है कि वो अपना शॉल गवर्नर के घर में छोड़ आए, तो ड्राइवर से कहते हैं भईया, चलो, वापस चलो, शॉल उठाना है। तो ड्राइवर गाड़ी घुमाता है। गवर्नर के घर आता है, नीतीश जी निकलते हैं, गवर्नर के पास जाते हैं, दरवाजा खोलते हैं। गवर्नर कहते हैं भाई, इतनी जल्दी वापस आ गए!

तो ये हालत है बिहार की। थोड़ा सा दबाव पड़ता है और यू-टर्न ले लेते हैं। दबाव क्यों पड़ा, क्योंकि बिहार में हमारे गठबंधन ने एक बात जनता के सामने रखी है। इस यात्रा में हम पांच न्याय की बात कर रहे हैं। उनमें से एक न्याय, उसको आप सामाजिक न्याय कह दीजिए, उसको आप हिस्सेदारी कह दीजिए, उसको आप भागीदारी कह दीजिए, उसके बारे में हम काम कर रहे हैं।’

समाजिक न्याय के बारे में बात करते हुए श्री गांधी ने कहा- ‘पहले एक एक्सरे हो जाए कि इस देश में किसकी कितनी आबादी है। लोगों की गिनती हो जाए। जनरल कास्ट के इतने लोग हैं, उसमें से अमीर इतने हैं, ओबीसी जाति के इतने लोग हैं, उसमें से अमीर इतने हैं, गरीब इतने हैं, किसान इतने हैं, मजदूर इतने हैं, भूखे इतने हैं, आदिवासी के इतने लोग हैं। इसमें आदिवासियों में अलग-अलग ट्राइब्स के इतने -इतने लोग हैं। दलित इतने हैं, इसमें दलितों में ये अलग-अलग लोग हैं, ये भूखे मर रहे हैं। ये मजदूरी कर रहे हैं, ये सड़क बना रहे हैं। बस मैं यही कह रहा हूं। सामाजिक न्याय का यही मतलब है और सामाजिक न्याय का पहला कदम देश का एक्सरे करना है।’

आर्थिक न्याय पर भी श्री गांधी ने कहा- ‘अमेरिका में मखाना 15 हजार रूपए किलो बिकता है और यहां पर हमारे किसान को 250 रुपए प्रति किलो, 2500 रुपए दस किलो की दर मिलती है। मैं आपसे पूछना चाहता हूं, ये पैसा जा कहां रहा है, किसके हाथ में जा रहा है? ये किसान के हाथ में तो नहीं जा रहा ना। तो ये देखिए, इसको कहते हैं आर्थिक अन्याय और ये हर चीज में हो रहा है।’

बिहार, आपने यात्रा में इतनी विशाल 'मोहब्बत की दुकान' खोली, उसके लिए दिल से धन्यवाद। #BharatJodoNyayYatra

Posted by Rahul Gandhi on Tuesday, January 30, 2024

लाखों की संख्या में जुटी जनसेना को अपने संबोधन के बाद श्री गांधी और भारत जोड़ो न्याय यात्रा का काफिला कटिहार के लिए निकल गया। रात्रि विश्राम के लिए यात्रा कटिहार के खेरिया में रूकी।

“देश का कोई भी व्यक्ति, जो अपने ऊपर अन्याय महसूस कर रहा है, जिसके ऊपर किसी भी तरह का अन्याय हो रहा है, वो न्याय योद्धा बन सकता है। अगर आप भी न्याय योद्धा बनना चाहते हैं तो 9891802024 पर मिस्ड कॉल करें।”

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