Day 16: सामाजिक न्याय को बिहार से बेहतर कोई नहीं समझ सकता

भारत जोड़ो न्याय यात्रा का सोलहवां दिन बंगाल के चोपड़ा, उत्तरी दिनाजपुर से शुरू हुआ। कल बंगाल में हजारों की संख्या में लोग श्री गांधी और भारत जोड़ो न्याय यात्रा के काफिले से जुड़ने के लिए आए थे। आज भी कुछ ऐसा ही हुआ। सुबह के समय बस यात्रा शुरू हुई तो फिर से रास्ते में हजारों लोगों की भीड़ श्री गांधी और न्याय यात्रा के बस का इंतजार कर रही थी। बंगाल की सीमा से न्याय यात्रा की बस अब बिहार की तरफ बढ़ चली थी। बिहार में पहला पड़ाव किशनगंज था।

रास्ते में श्री गांधी का काफिला एक चाय की दुकान पर रूका। श्री गांधी को कुछ ट्रक ड्राइवर यहां पर चाय पीते दिख गए थे इसलिए उन्होंने अचानक से ये ब्रेक लेने की सोची। चाय दुकान पर बैठे ट्रक ड्राइवर से श्री गांधी ने चाय की चुस्कियों के बीच थोड़ी देर बातचीत की। उनका हालचाल जाना और उनसे उनकी परेशानियां जानी।

फिर काफिला बढ़ चला बिहार की ओर। बिहार की सीमा में भी न्याय यात्रा की बस और श्री गांधी के साथ चलने के लिए हजारों लोगों की भीड़ इंतजार कर रही थी। सभी राहुल गांधी की एक झलक पाने और अन्याय के खिलाफ, न्याय के इस जंग में कांग्रेस पार्टी का साथ देने के लिए बेताब थे। किशनगंज राष्ट्रीय राजमार्ग से शहीद अशफाक उल्ला खान स्टेडियम तक श्री गांधी ने पदयात्रा की। हजारों लोगों की भीड़ इस पदयात्रा में श्री गांधी के साथ थी। स्टेडियम में बंगाल कांग्रेस के अध्यक्ष द्वारा बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री अखिलेश प्रसाद सिंह को राष्ट्रीय ध्वज हस्तांतरित कर भारत जोड़ो न्याय यात्रा के बिहार में प्रवेश की विधिवत घोषणा कर दी गई।

इस मौके पर स्टेडियम में मौजूद विशाल जनसभा को श्री गांधी ने संबोधित किया और कहा- ‘बिना सामाजिक न्याय और आर्थिक न्याय के ये देश प्रगति कर ही नहीं सकता है। ये सब खोखले शब्द हैं। वो जिस विकास की बात करते रहते हैं, सामाजिक, आर्थिक न्याय के बिना ये काम किया ही नहीं जा सकता है।’

श्री गांधी ने देश में ओबीसी, दलित, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे अन्याय के बारे में भी लोगों को बताया। उन्होंने कहा- ‘पूरा देश जानता है कि देश में सबसे बड़ी आबादी ओबीसी वर्ग की है। तकरीबन 50 प्रतिशत आबादी ओबीसी वर्ग की है। 15 प्रतिशत दलित हैं। 12 प्रतिशत आदिवासी हैं। तकरीबन 15 प्रतिशत अल्पसंख्यक हैं। यहां बैठे ओबीसी लोगों को मैं बताना चाहता हूं कि हिंदुस्तान की सरकार को 90 IAS अफसर चलाते हैं। इन 90 अफसरों में से ओबीसी वर्ग के सिर्फ 3 अफसर हैं। और अगर बजट में 100 रूपया बांटा जाता है तो ओबीसी वर्ग के अफसर सिर्फ 5 रूपया बांटते हैं। ये सच्चाई है। और ये ओबीसी, दलित, आदिवासी वर्ग के साथ हो रहा है। इसलिए ही हमने सामाजिक न्याय का सबसे क्रांतिकारी काम करने का निर्णय ले लिया है।’

साथ ही देश की सामाजिक क्रांति में बिहार के योगदान के बारे में बताते हुए श्री गांधी ने बिहार की जनता से पुन: सामाजिक क्रांति का पुरोधा बनने की अपील भी की। उपस्थित लोगों का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा- ‘एक बात बिहार की जनता को नहीं भूलना चाहिए कि जब भी देश में सामाजिक न्याय की बात हुई है तो बिहार ने ही आगे बढ़कर मार्गदर्शन किया है। और ये आपकी ही जिम्मेदारी है क्योंकि देश आपकी ओर देखता है। ये आपकी जिम्मेदारी है और आपको पूरी करनी पड़ेगी। मैं बिहार के हर नागरिक से कह रहा हूं, देश में प्रगति होनी है तो आर्थिक और सामाजिक न्याय की जरूरत है। और सामाजिक न्याय को बिहार से बेहतर कोई नहीं समझ सकता।’

साथ ही देश की सामाजिक क्रांति में बिहार के योगदान के बारे में बताते हुए श्री गांधी ने बिहार की जनता से पुन: सामाजिक क्रांति का पुरोधा बनने की अपील भी की। उपस्थित लोगों का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा- ‘एक बात बिहार की जनता को नहीं भूलना चाहिए कि जब भी देश में सामाजिक न्याय की बात हुई है तो बिहार ने ही आगे बढ़कर मार्गदर्शन किया है। और ये आपकी ही जिम्मेदारी है क्योंकि देश आपकी ओर देखता है। ये आपकी जिम्मेदारी है और आपको पूरी करनी पड़ेगी। मैं बिहार के हर नागरिक से कह रहा हूं, देश में प्रगति होनी है तो आर्थिक और सामाजिक न्याय की जरूरत है। और सामाजिक न्याय को बिहार से बेहतर कोई नहीं समझ सकता।’

लोगों के इस संबोधन के बाद न्याय यात्रा दोपहर के ब्रेक के लिए बुधिमारी की तरफ चल पड़ी। लंच के बाद न्याय यात्रा किशनगंज के तुपामारी गांव से शुरू हुई और अपने दूसरे पड़ाव अररिया की तरफ निकल पड़ी। इस दौरान एटक (AITUC) के प्रतिनिधिमंडल ने श्री गांधी से मुलाकात की। उन्होंने श्री गांधी को कामगारों को संगठित करने की जरूरत, उन्हें न्यूनतम वेतन और उनके रहन-सहन में लागत के बारे में विस्तार से चर्चा की। साथ ही बिहार में युवाओं के बीच फैली बेरोजगारी, राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं और अच्छी शिक्षा व्यवस्था की कमी के बारे में विस्तार से चर्चा की।

रास्ते में श्री गांधी ने कुछ स्थानीय विधायकों से भी मुलाकात की और उनके विधानसभा की स्थिति की जानकारी ली।

अररिया में श्री गांधी को भीड़ की वजह से एक बार फिर अपनी पदयात्रा को स्थगित कर रोडशो करने पर मजबूर होना पड़ा। हजारों की संख्या में उपस्थित उत्साही लोग और संकरी सड़कें, श्री गांधी के लिए पदयात्रा करना मुमकिन ही न था। रोड शो अररिया के ज़ीरो माइल से शुरू होकर चांदनी चौक तक चला। इसके बाद श्री गांधी ने हजारों की संख्या में उपस्थित अपने समर्थकों को संबोधित किया।

उन्होंने कहा- ‘हमने जो सामाजिक न्याय, जातीय जनगणना की बात की है। सामाजिक न्याय का पहला कदम जातीय जनगणना है। ये पता लगाना कि इस देश में पिछड़े वर्ग के कितने हैं, आदिवासी कितने हैं, दलित कितने हैं, जेनरल कितने हैं। ये देश का एक प्रकार से एक्स-रे है। एक्स-रे होने के बाद जो पिछड़ों की हिस्सेदारी बनती है, जो दलितों की हिस्सेदारी बनती है वो उनको मिलने का काम कांग्रेस पार्टी करने जा रही है।’

इस संबोधन के बाद कैंप की तरफ जाते हुए श्री गांधी ने रास्ते में रूके और एक मंदिर में माथा भी टेका। श्री गांधी ने भगवान से प्रार्थना की, फिर काफिला पीडी यादव इंटर कॉलेज की तरफ चल पड़ा। यहां ही भारत जोड़ो न्याय यात्रा के काफिले के रूकने का इंतजाम किया गया था।

“देश का कोई भी व्यक्ति, जो अपने ऊपर अन्याय महसूस कर रहा है, जिसके ऊपर किसी भी तरह का अन्याय हो रहा है, वो न्याय योद्धा बन सकता है। अगर आप भी न्याय योद्धा बनना चाहते हैं तो 9891802024 पर मिस्ड कॉल करें।”

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